श्रद्धा की लाज

👌बहूत सुंदर कथा👌
 एक राजा ने भगवान कृष्ण का एक मंदिर बनवाया

और पूजा के लिए एक पुजारी को लगा दिया. पुजारी बड़े भाव से  बिहारीजी की सेवा करने लगे. भगवान की पूजा-अर्चना और सेवा-टहल करते पुजारी की उम्र बीत गई. 


राजा रोज एक फूलों की माला सेवक के हाथ से भेजा करता था.पुजारी वह माला बिहारीजी को पहना देते थे. जब राजा दर्शन करने आता तो पुजारी वह माला बिहारीजी के गले से उतारकर राजा को पहना देते थे. यह रोज का नियम था. एक दिन राजा किसी वजह से मंदिर नहीं जा सका.

उसने एक सेवक से कहा- माला लेकर मंदिर जाओ. पुजारी से कहना आज मैं नहीं आ पाउंगा. सेवक ने जाकर माला पुजारी को दे दी और बता दिया कि आज महाराज का इंतजार न करें. सेवक वापस आ गया. पुजारी ने माला बिहारीजी को पहना दी. फिर उन्हें विचार आया कि आज तक मैं अपने बिहारीजी की चढ़ी माला राजा को ही पहनाता रहा. कभी ये सौभाग्य मुझे नहीं मिला.जीवन का कोई भरोसा नहीं कब रूठ जाए. आज मेरे प्रभु ने मुझ पर बड़ी कृपा की है. राजा आज आएंगे नहीं, तो क्यों न माला मैं पहन लूं. यह सोचकर पुजारी ने बिहारीजी के गले से माला उतारकर स्वयं पहन ली. 


इतने में सेवक आया और उसने बताया कि राजा की सवारी बस मंदिर में पहुंचने ही वाली है.यह सुनकर पुजारी कांप गए. उन्होंने सोचा अगर राजा ने माला मेरे गले में देख ली तो मुझ पर क्रोधित होंगे. इस भय से उन्होंने अपने गले से माला उतारकर बिहारीजी को फिर से पहना दी. जैसे ही राजा दर्शन को आया तो पुजारी ने नियम अुसार फिर से वह माला उतार कर राजा के गले में पहना दी. माला पहना रहे थे तभी राजा को माला में एक सफ़ेद बाल दिखा.राजा को सारा माजरा समझ गया कि पुजारी ने माला स्वयं पहन ली थी और फिर निकालकर वापस डाल दी होगी. 


पुजारी ऐसा छल करता है, यह सोचकर राजा को बहुत गुस्सा आया. उसने पुजारी जी से पूछा- पुजारीजी यह सफ़ेद बाल किसका है.? पुजारी को लगा कि अगर सच बोलता हूं तो राजा दंड दे देंगे इसलिए जान छुड़ाने के लिए पुजारी ने कहा- महाराज यहसफ़ेद बाल तो बिहारीजी का है. 


अब तो राजा गुस्से से आग- बबूला हो गया कि ये पुजारी झूठ पर झूठ बोले जा रहा है.भला बिहारीजी के बाल भी कहीं सफ़ेद होते हैं. राजा ने कहा- पुजारी अगर यह सफेद बाल बिहारीजी का है तो सुबह शृंगार के समय मैं आउंगा और देखूंगा कि बिहारीजी के बाल सफ़ेद है या काले. अगर बिहारीजी के बाल काले निकले तो आपको फांसी हो जाएगी. राजा हुक्म सुनाकर चला गया.


अब पुजारी रोकर बिहारीजी से विनती करने लगे- प्रभु मैं जानता हूं आपके सम्मुख मैंने झूठ बोलने का अपराध किया. अपने गले में डाली माला पुनः आपको पहना दी. आपकी सेवा करते-करते वृद्ध हो गया. यह लालसा ही रही कि कभी आपको चढ़ी माला पहनने का सौभाग्य मिले. इसी लोभ में यह सब अपराध हुआ. मेरे ठाकुरजी पहली बार यह लोभ हुआ और ऐसी विपत्ति आ पड़ी है. मेरे नाथ अब नहींहोगा ऐसा अपराध. अब आप ही बचाइए नहीं तो कल सुबह मुझे फाँसी पर चढा दिया जाएगा. पुजारी सारी रात रोते रहे. 


सुबह होते ही राजा मंदिर में आ गया. उसने कहा कि आ प्रभु का शृंगार वह स्वयं करेगा. इतना कहकर राजा ने जैसे ही मुकुट हटाया तो हैरान रह गया. बिहारीजी के सारे बाल सफ़ेद थे. राजा को लगा, पुजारी ने जान बचाने के लिए बिहारीजी के बाल रंग दिए होंगे. गुस्से से तमतमाते हुए उसने बाल की जांच करनी चाही. बाल असली हैं या नकली यब समझने के लिए उसने जैसे ही बिहारी जी के बाल तोडे, बिहारीजी के सिर से खून कीधार बहने लगी. 


राजा ने प्रभु के चरण पकड़ लिए और क्षमा मांगने लगा. बिहारीजी की मूर्ति से आवाज आई- राजा तुमने आज तक मुझे केवल मूर्ति ही समझा इसलिए आज से मैं तुम्हारे लिए मूर्ति ही हूँ. पुजारीजी मुझे साक्षात भगवान् समझते हैं. उनकी श्रद्धा की लाज रखने के लिए आज मुझे अपने बाल सफेद करने पड़े व रक्त की धार भी बहानी पड़ी तुझे समझाने के लिए.

यह कहानी किसी पुराण से तो नहीं है लेकिन इसका मर्म किसी पुराण की कथा से कम भी नहीं है. कहते हैं- समझो तो देव नहीं तो पत्थर.श्रद्धा हो तो उन्हीं पत्थरों में भगवान सप्राण होकर भक्त से मिलने आ जाएंगे ।।

श्री वृन्दावन बांके बिहारी लाल की जय हो  ।।

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दिल के दौरे से बचने के लिए उपाय

ये याद रखिये की भारत मैं सबसे ज्यादा मौते कोलस्ट्रोल बढ़ने के कारण हार्ट अटैक से होती हैं।
आप खुद अपने ही घर मैं ऐसे बहुत से लोगो को जानते होंगे जिनका वजन व कोलस्ट्रोल बढ़ा हुआ हे।

अमेरिका की कईं बड़ी बड़ी कंपनिया भारत मैं दिल के रोगियों (heart patients) को अरबों की दवाई बेच रही हैं !

लेकिन अगर आपको कोई तकलीफ हुई तो डॉक्टर कहेगा angioplasty (एन्जीओप्लास्टी) करवाओ।

इस ऑपरेशन मे डॉक्टर दिल की नली में एक spring डालते हैं जिसे stent कहते हैं।

यह stent अमेरिका में बनता है और इसका cost of production सिर्फ 3 डॉलर (रू.150-180) है।

इसी stent को भारत मे लाकर 3-5 लाख रूपए मे बेचा जाता है व आपको लूटा जाता है। 

डॉक्टरों को लाखों रूपए का commission मिलता है इसलिए व आपसे बार बार कहता है कि angioplasty करवाओ।

Cholestrol, BP ya heart attack आने की मुख्य वजह है, Angioplasty ऑपरेशन।

यह कभी किसी का सफल नहीं होता।

क्यूँकी डॉक्टर, जो spring दिल की नली मे डालता है वह बिलकुल pen की spring की तरह होती है।

कुछ ही महीनो में उस spring की दोनों साइडों पर आगे व पीछे blockage (cholestrol व fat) जमा होना शुरू हो जाता है। 

इसके बाद फिर आता है दूसरा heart attack ( हार्ट अटैक )

डॉक्टर कहता हें फिर से angioplasty करवाओ।

आपके लाखो रूपए लुटता है और आपकी जिंदगी इसी में निकल जाती हैं।

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               अब पढ़िए 

       उसका आयुर्वेदिक इलाज

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अदरक (ginger juice) – 

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यह खून को पतला करता है।

यह दर्द को प्राकृतिक तरीके से 90% तक कम करता हें।

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लहसुन (garlic juice) 

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इसमें मौजूद allicin तत्व cholesterol व BP को कम करता है।

वह हार्ट ब्लॉकेज को खोलता है।

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नींबू (lemon juice) 

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इसमें मौजूद antioxidants, vitamin C व potassium खून को साफ़ करते हैं।

ये रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) बढ़ाते हैं।

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एप्पल साइडर सिरका ( apple cider vinegar) 

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इसमें 90 प्रकार के तत्व हैं जो शरीर की सारी नसों को खोलते है, पेट साफ़ करते हैं व थकान को मिटाते हैं।

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         इन देशी दवाओं को 

       इस तरह उपयोग में लेवें 

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1-एक कप नींबू का रस लें;

2-एक कप अदरक का रस लें;  

3-एक कप लहसुन का रस लें; 

4-एक कप एप्पल का सिरका लें; 

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चारों को मिला कर धीमीं आंच पर गरम करें जब 3 कप रह जाए तो उसे ठण्डा कर लें;

अब आप 

उसमें 3 कप शहद मिला लें

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रोज इस दवा के 3 चम्मच सुबह खाली पेट लें जिससे

सारी ब्लॉकेज खत्म हो जाएंगी।

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आप सभी से हाथ जोड़ कर विनती है कि इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें ताकि सभी इस दवा से अपना इलाज कर  सकें ; धन्यवाद् !

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     ऐसे में दिल के दौरे से बचने 

            के लिए ये उपाय

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ભગવાનદાસ સારસ્વત

*ચોર્યાસી વૈષ્ણવોની વાર્તાના પ્રસંગો*

 

 *ભગવાનદાસ સારસ્વત*
શ્રી મહાપ્રભુજીના સેવક તે હાજીપુરના બ્રાહ્મણ હતાં.તેઓએ તેમની સત્તર વર્ષની આયુમાં યજમાન વૃતિના કડવા અનુભવથી નિશ્ચય કર્યો કે રાજસી લોકોની ચાકરીઓ કરવી નથી. તેથી તેઓ કમાઈ કરવા માટે પૂર્વમાં ગયાં.
જ્યારે તેઓ પટણાથી આગળ જઇ રહ્યા હતાં, ત્યારે માર્ગમાં તેમનો ભેંટો શ્રી મહાપ્રભુજી સાથે થયો. 

શ્રી મહાપ્રભુજી જે ભગવદ્વાર્તા કહેતા તે ભગવાનદાસ સાંભળતાં. એક દિવસ ભગવાનદાસે શ્રી મહાપ્રભુજીના સેવક કૃષ્ણદાસજી ને કહ્યું કે મને કોઈ સેવા ટહેલ બતાવો તો હું પણ આપની સાથે કાર્યરત થાઉં. ત્યારે કૃષ્ણદાસજી કહે કે આપ શ્રી મહાપ્રભુજીના સેવક નથી, તેથી આપના હાથ ની એકપણ સેવાનો અમે કે અમારા આચાર્યવર સ્વીકાર ન કરી શકીએ.
ત્યારે ભગવાનદાસ શંકિત થઈ ગયાં. તેમણે આ આ વાત શ્રી મહાપ્રભુજીને કહીને પૂછ્,યું કે એક શુદ્ર આપનું જળ લાવે છે, તે આપ સ્વીકાર કરો છો. જ્યારે હું તો બ્રાહ્મણ છુ, તેમ છતાં આપ મારી સેવાનો સ્વીકાર ન કરો, તેમ કેમ બને?
ત્યારે શ્રી મહાપ્રભુજી કહે કે અમારો મત એવો છે, કે જે ભગવાનને ન જાણે તે ક્ષુદ્રથી પણ હલકો છે. અને જે ભગવાનને જાણે છે તે બ્રાહ્મણથી પણ સર્વોપરી છે.
આ સાંભળી ભગવાનદાસ પૂછવા લાગ્યા કે જીવ ભગવાન ને કઈ રીતે જાણે? 

ત્યારે શ્રી મહાપ્રભુજીએ કહ્યું કે જ્યારે શ્રી ઠાકુરજી જીવ પર કૃપા કરે ત્યારે જીવ ભગવાનને જાણી શકે.
ત્યારે ભગવાનદાસે કહ્યું કે શ્રી ઠાકુરજી કૃપા ક્યાં પ્રકારે કરે? 

ત્યારે શ્રી મહાપ્રભુજી કહે કે ગુરૂ પ્રસન્ન થાય ત્યારે શ્રી ઠાકુરજી પ્રસન્ન થાય એમ સમજવું.
ભગવાનદાસે કહ્યું કે મારે કોઈ ગુરૂ નથી, માટે આપ જ મારા ગુરૂ બની મારું માર્ગદર્શન કરો. ત્યારે શ્રી મહાપ્રભુજીએ તેને નામ નિવેદન કરાવી શરણે લઈ તેમની વિવિધ પ્રકારની ટહેલનો સ્વીકાર કર્યો.
એકવાર શ્રી મહાપ્રભુજી ભગવાનદાસજીને ઘેર પધાર્યા તેમના હાથની સામગ્રીનો સ્વીકાર કર્યો. તેમના માતપિતાને નામ સાંભળવ્યું પછી તેઓ અડેલ પાછા પધાર્યા. ભગવાનદાસે જ્યાં તેમના ગૃહમાં જ્યાં બિરાજયાં હતાં, તે જ્ગ્યાને ભગવાનદાસ ચોતરી કરી નિત્ય સ્વચ્છ રાખતાં. અને નિત્ય ત્યાં દંડવત કરી એમ ભાવ લાવતાં, કે શ્રી મહાપ્રભુજી અહીં સાક્ષાત બિરાજે છે. આચાર્યશ્રી તેમને નિત્ય ત્યાં દર્શન આપતા.
શ્રી મહાપ્રભુજીના આવા કૃપાપાત્ર સેવકને વંદન કરીએ

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‘श्री जयकृष्ण दास बाबा जी’ 

🌹 *ठाकुर जी के प्रेमी भक्त ‘श्री जयकृष्ण दास बाबा जी’ के जीवन का एक सुंदर प्रसंग* 🌹

🌺गोपाल की उल्टी रीति है।

अगर कोई बुलाता है तब भी उसके पास नहीं जाते, और कभी कोई नहीं भी बुलाता तो उसके पास जरूर जाते हैं।
🌺नित्य लीला स्थली श्री धाम वृंदावन के काम्यवन में श्री जयकृष्ण दास बाबा जी गोप-बालकों के उत्पात से तंग आकर विमलकुण्ड़ के किनारे एकांत कुटिया में रहकर भजन किया करते थे।
🌺श्री जयकृष्ण दास बाबा जी हर समय भजन में लीन रहते थे। केवल एक बार मधुकरी के लिए ग्राम में जाया करते और शेष समय दिन-रात हरिनाम जपते।
🌺एक दिन मध्याह्न में सिद्ध जयकृष्ण दास बाबा जी की अन्तरंग सेवा में हमारे ठाकुर जी की एक ऐसी घटना घटी कि वे’ श्रीकृष्ण’ विरह में व्याकुल होने लगे।
🌺 हुआ यह कि उस समय विमला कुण्ड के चारों ओर असंख्य गाय और गोप-बालक आकर उपस्थित हुए।

गोप-बालक बाहर से चीखकर कहने लगे :- “बाबा प्यास लगी है, जल प्याय दे।”
🌺जयकृष्ण दास बाबा तो पहले से ही गोप-बालकों के उत्पात से परेशान थे, इसलिए बाबा चुपचाप अपनी कुटिया में बैठे रहे।
🌺पर ठाकुर जी कहाँ मानने वाले थे? अपने गोप-सखाओं के साथ तरह-तरह के उत्पात करने लगे।

कुटिया के दरवाजे के पास आकर बोले :- 

🌹 *”अरे ओ बँगाली बाबा! हम जाने हैं तू कहाँ भजन करे है। दयाहीन बाबा कसाई के बराबर होय हैं।* 🌹

अरे बाबा कुटिया से निकलकर जल प्याय दे, हमको बड़ी प्यास लगी है।”

अब गोप-बालक बाबा को परेशान करने लगे।
🌺जयकृष्ण दास बाबा बालकों के उत्पात से क्रुद्ध हो लकड़ी हाथ में लेकर कुटिया से बाहर निकल पड़े। बाबा जैसे ही कुटिया से बाहर आये तो देखा कि कुटिया के चारों तरफ असंख्य गाय और गोप-बालक हैं। सभी गोप-बालक एक से बढ़कर एक सुंदर। एक से बढ़कर एक अदभुत और मनमोहक श्रृंगार।
🌺उन गोप-बालकों को देखकर ही जयकृष्ण दास बाबा जी का क्रोध ठंडा पड़ गया।
🌺जयकृष्ण दास बाबा ने गोप-बालकों से पूछा:- “लाला, तुम सभी कौन गाँव से आये हो?”

सभी बालकों ने एक साथ जवाब दिया:- “नंदगाँव तें।”
🌺बाबा ने एक बालक को पास बुलाकर प्रेम से पूछा :- “तेरा नाम क्या है?”

बालक ने कहा :- “मेरा नाम *’कन्हैंया’* है।”
🌺एक और बालक से बाबा ने पूछा:- “लाला तेरा नाम क्या है?”

बालक ने कहा:- “बलदाऊ ! मेरा नाम *’बलदाऊ*’ है।”
🌺तब गोप बालक कन्हैया ने कहा :- “देख बाबा जी पहले जल  पियाय दे, पाछे बात करियो।”

बाबा ने स्नेह परवश हो करुवे से गोप-बालकों को जल पिला दिया।
🌺 कन्हैया ने कहा :- “देख बाबा हम नित्य किते दूर से आवें है, प्यासे हो जायं हैं। तू कछु जल और बालभोग राख्यो कर।”
🌺 *”नहीं-नहीं रोज-रोज आकर अपाधि नहीं करना”,* कहते हुए बाबा कुटिया में चले गये।
🌺बाबा कुटिया में आकर सोचने लगे :- “ऐसे सुंदर मनमोहक बालक और ऐसी सुंदर गायें तो मैंने कभी नहीं देखीं, न कभी ऐसी मधुर बोली ही सुनी। ये इस जगत के थे या किसी और जगत के!”
🌺यह सब सोचते हुए जयकृष्ण दास बाबा जी उन गोप-बालकों को एक बार फिर देखने को जैसे ही कुटिया से बाहर निकले, वहाँ न गायें थीं और न ही कोई गोप बालक। दूर दूर तक गायों तथा बालकों के कोई चिन्ह नहीं थे।
🌺जयकृष्ण दास बाबा दुःखित और अनुतप्त हो अपने दुर्भाग्य और गोप-बालकों के प्रति अपने अंतिम वाक्य ‘रोज-रोज आकर अपाधि नहीं करना’ की बात सोचते सोचते आविष्ट हो गये।

बाबा रात भर ‘प्रिया प्रियतम’ की याद में अश्रु-विसर्जन करते रहे।
🌺उसी समय ‘ श्रीकृष्ण’ बाबा के सामने उपस्थित हो उन्हें सान्त्वना देते हुए बोले :- *’बाबा, दुःख मत कर कल मैं तेरे पास आऊँगो।*’

तब श्री जयकृष्ण दास बाबा जी का आवेश भंग हुआ और उन्होंने धैर्य धारण किया।
🌺दूसरे दिन एक वृद्धा व्रज माई जयकृष्ण दास बाबा की कुटिया में बाल-गोपाल का एक स्वरूप लेकर आई और बाबा से बोली :- “बाबा, मोपे अब गोपाल की सेवा नाय होय। बाबा, आज से तू मेरे गोपाल की सेवा किया कर।”
🌺जयकृष्ण दास बाबा ने कहा :- “माई, मैं कैसे इनकी सेवा करूँगा? रोज सेवा की सामग्री और भोग कहाँ से लाऊँगा?”

“बाबा, तू बस सेवा किया करना सेवा की सामग्री मैं रोज आकर दे जाऊँगी।”
🌺बाल-गोपाल  बाबा को पधराकर ऐसा कहते हुए वृद्धा माई चली गई। गोपाल जी की रूप माधुरी देख बाबा मुग्ध हो गये।
🌺उसी रात जयकृष्ण दास बाबा को स्वप्न में वृद्धा माई ने श्री वृन्दा जी के रूप मे दर्शन दिये।
🌺बाल-गोपाल की उल्टी ही रीति है। अगर कोई बुलाता है तब भी उसके पास नहीं जाते, और कभी कोई नहीं भी बुलाता तो उसके पास जरूर जाते हैं।
🌺ऋषि मुनि भी बुला-बुलाकर हार जाते हैं, उनके मानस पटल पर भी कभी उदय नहीं होते। पर उनके प्रेमी भक्त उन्हें नहीं भी बुलाते तो हाथ धोकर अपने भक्त के पीछे पड़ जाते हैं।
🌺जयकृष्ण दास बाबा ने उनके आने को उपाधि मानकर उनसे यही कहा था न *’रोज-रोज आकर अपाधि नहीं करन*’ इसलिए आज ठाकुर जी बाबा के पास आकर ऐसे जमकर बैठे कि जाने का नाम भी नहीं लेते।

🌹 *श्री बाल-कृष्ण-लाल की जय हो।* 🌹

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चूना अमृत है 

चूना जो आप पान में खाते है वो सत्तर बीमारी ठीक कर देते है….!
” चूना अमृत है ” ..
* चूना एक टुकडा छोटे से मिट्टी के बर्तन मे डालकर पानी से भर दे , चूना गलकर नीचे और पानी ऊपर होगा ! 
वही एक चम्मच पानी किसी भी खाने की

वस्तु के साथ लेना है ! 
50 के उम्र के बाद कोई कैल्शियम की दवा शरीर मे जल्दी नही घुलती चूना तुरन्त घुल व पच जाता है …
* जैसे किसी को पीलिया हो जाये माने जॉन्डिस

उसकी सबसे अच्छी दवा है चूना ;गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी पीलिया ठीक कर देता है ।
* बिद्यार्थीओ के लिए चूना बहुत अच्छा है जो

लम्बाई बढाता है ..
* गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में

मिला के खाना चाहिए, दही नही है तो दाल में

मिला के खाओ, दाल नही है तो पानी में मिला

के पियो – इससे लम्बाई बढने के साथ स्मरण शक्ति

भी बहुत अच्छा होता है ।
* जिन बच्चों की बुद्धि कम काम करती है मतिमंद

बच्चे उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना. जो बच्चे

बुद्धि से कम है, दिमाग देर में काम करते है, देर में

सोचते है हर चीज उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को

चूना खिलाने से अच्छे हो जायेंगे ।
* गेहूँ के दाने के बराबर चूना हर दिन खाना दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना । जब

कोई माँ गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा केल्शियम की जरुरत होती है और चूना केल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है । गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए ..अनार के रस में –

अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये..तो चार फायदे होंगे –

पहला फायदा :-

माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही

होगी और नॉर्मल डीलिवरी होगा,

दूसरा :-

बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हृष्ट पुष्ट और तंदुरुस्त

होगा ,

तीसरा फ़ायदा :-

बच्चा जिन्दगी में जल्दी बीमार नही पड़ता

जिसकी माँ ने चूना खाया ,

चौथा सबसे बड़ा लाभ :-

बच्चा बहुत होशियार होता है बहुत Intelligent और Brilliant होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है ।
* चूना घुटने का दर्द ठीक करता है , कमर का दर्द

ठीक करता है ,कंधे का दर्द ठीक करता है,
* एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis वो चूने से ठीक होता है ।
* कई बार हमारे रीढ़की हड्डी में जो मनके होते है

उसमे दुरी बढ़ जाती है Gap आ जाता है – ये चूना ही ठीक करता है उसको; रीड़ की हड्डी की सब बीमारिया चूने से ठीक होता है । अगर आपकी हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है । चूना खाइए सुबह को खाली पेट ।
* मुंह में ठंडा गरम पानी लगता है तो चूना खाओ

बिलकुल ठीक हो जाता है ,
* मुंह में अगर छाले हो गए है तो चूने का पानी पियो तुरन्त ठीक हो जाता है ।
* शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए , एनीमिया है खून की कमी है उसकी सबसे अच्छी दवा है ये चूना , चूना पीते रहो गन्ने के रस में , या संतरे के रस में नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में – अनार के रस में चूना पिए खून बहुत बढता है , बहुत जल्दी खून बनता है – एक कप अनार का रस गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह खाली पेट ।
* घुटने में घिसाव आ गया और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नही चूना खाते रहिये और हरसिंगार के पत्ते का काढ़ा खाइए घुटने बहुत अच्छे काम करेंगे । 

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