Religious

ષોડશગ્રંથોનો નિત્યપાઠ શા માટે ?

દરેક વૈષ્ણવે દરરોજ શ્રીમહાપ્રભુજીરચિત ‘ષોડશગ્રંથ’ના સોળે ગ્રંથોનો અવશ્ય પાઠ કરવો.

પાઠ કરતાં નીચેની બાબતો ધ્યાનમાં રાખવી :

(૧) દરેક શ્લોકનો અર્થ સમજી-વિચારીને પાઠ કરવો. Continue reading

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सर्वेश्वरश्च सर्वात्मा निजेच्छात:करिष्यति

प्रभु की सेवा करते समय किसी समय भगवान चित्त में उद्वेग कराकर जो जो करेंगें उनकी वैसी ही लीला अर्थात खेल मानकर बहुत शीघ्र चिंता का त्याग करें।”-श्रीनवरत्नस्तोत्रम्।

महाप्रभुजी ने बडी तथ्यात्मक बात कही है। हमें जो उद्वेग होता है इसका मूल कारण प्रभु स्वयं हैं। ‘नाना भाव मुझी से होते हैं’ – ऐसा स्वयं प्रभु ने कहा है। हम समझते हैं उद्वेग किसी व्यक्ति घटना परिस्थिति के कारण होता है तब हम राग द्वेष के शिकार हो जाते हैं। किसी से नफरत हो जाती है तो किसी से डर, भय, शंका इत्यादि। समझना यह है कि उद्वेग का कारण प्रभु स्वयं हैं। ऐसा क्यों? तो वल्लभ कहते हैं – ये उनकी लीला है। Continue reading

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Karna Converse with Krishna

The best conversation between two characters from Mahabharat 👌👌

Karna asks Krishna – “My mother left me the moment I was born. Is it my fault I was born an illegitimate child? I did not get education from Dhronacharya because I was considered a non Kshatriya. Parshu-Raam taught me but then gave me the curse to forget everything since I was a kshatriya. Continue reading

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भगवान शिव का वाहन-‘नंदी’ की उत्पत्ती कथा !

पुराणों में यह कथा मिलती है कि शिलाद मुनि के ब्रह्मचारी हो जाने के कारण वंश समाप्त होता देख उनके पितरोंने अपनी चिंता उनसे व्यक्त की। शिलाद निरंतर योग तप आदि में व्यस्त रहने के कारण गृहस्थाश्रम नहीं अपनाना चाहते थे । अतः उन्होंने संतान की कामना से इंद्र देव को तप से प्रसन्न कर जन्म और मृत्यु से हीन पुत्र का वरदान मांगा। इंद्र ने इसमें असर्मथता प्रकट की तथा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कहा। तब शिलाद ने कठोर तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया और उनके ही समान मृत्युहीन तथा दिव्य पुत्र की मांग की।          Continue reading

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