विश्व में गूँजे हमारी भारती

विश्व में गूँजे हमारी भारती जन जन उतारे आरती
धन्य देश महान धन्य हिंदुस्थान ॥ध्रु॥

इस धरा की गोद में संसार को संस्कॄति मिली है ।
हर शिखर की धवलता इस देश की जिंदादिली है ।
सिंधु की हर लहर चरण पखारती नदियाँ सदा सिंगारती ॥१॥

चल दिया मानो सिकंदर इस धरा पर टेक घुटने।
शत्रु की क्या जब लगेगा इस वतन का शौर्य जगने ।
कुपित हो जब मातृ-भूमि निहारती रण चण्डिका हुंकारती ॥२॥

विश्व का हर देश जब भी दिग्भ्रमित हो लड़खड़ाया ।
लक्ष्य की पहचान करने इस धरा के पास आया ।
भूमि यह हर दलित को पुचकारती हर पतित को उद्धारती ॥३॥

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