हमको है अभिमान देश का

हमको है अभिमान देश का ।
जिसके पाँव पखारे सागर शोभित जिस पर स्वर्ग वही तो
शीश मुकुट हिमवान देश का हमको है अभिमान देश का ॥ १ ॥

जिसके रजकण का कर चन्दन झुक-झुक नभ करता पद वन्दन
कली कली का प्राण खोलता स्वर्ण-रश्मि का गान देश का
हमको है अभिमान देश का ॥ २ ॥

कोटि बाहु में शक्ति इसी की कोटि प्राणो में भक्ती इसी की
कोटि-कोटि कण्ठों में गुञ्जित मधुर-मधुर जय गान देश का
हमको है अभिमान देश का ॥ ३ ॥

इस पर तन-मन प्राण निछावर भाग्य और भगवान निछावर
सींच खून से हम देखेंगे मुख-पंकज अम्लान देश का ।
हमको है अभिमान देश का ॥ ४ ॥

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