વિવિધ પદ

नीलांबर पहेर तन गोरें, झूलत सुरंग हिंडोरें ।
मनि मानिक हीरा रतन मुक्ताफल, शोभित है तन गोरे ॥ १ ॥
सुद तिथी नागपंचमी दिन दयाल, दरस दीवो जोरें ।
जन्म दिवस जान बलदाऊ को मदनमोहन, कृपा करी अतोरें ॥ २ ॥
झुलत रंग बढ्योजू परस्पर झुलावन, मिले आय चहुं ओरें ।
हरिदास प्रभु की यह शोभा चित चोर्यो, इन नयन की कोरें ॥ ३ ॥

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

झूलोतो सुरत हिंडोरे झुलाऊँ ।
मरुवेमयार करों हित चितके, तन मन खंभ बनाऊँ ।। १ ।।

सुधि पटुली बुध्धि डांडीवेलन, नेह बिछोना बिछाऊँ ।
अति ओसेर धरों रूचिकलशा, प्रीतिध्वजा फहराऊं ।। २ ।।

गरजन कोहोक हिलग मिलवेकि, प्रेम नीर वरसाऊँ ।
श्रीविठ्ठल गिरिधरन झुलाऊँ, जो इक लेकर पाऊँ ।। ३ ।।

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

झूलो की रुत है आई, ओ श्री राधा प्यारी…
सावन सुहाना आया, गर्जन भी साथ लाया..
अब देर न लगाओ…जल्दी करो तैयारी …
झूलो की रुत है आई, ओ श्री राधा प्यारी…

श्री वंशीवट पे प्यारी, सुन्दर कदंब की डारी…
सुन्दर सजा है झुला… जल्दी पधारो प्यारी…

झुला तुम्हे झुलाऊ, और बांसुरी सुनाऊ…
अब मान को त्यागो, ये रुत बड़ी है प्यारी…
झूलो की रुत है आई, ओ श्री राधा प्यारी…

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

आये मेरे नंदनंदन के प्यारे
आये मेरे नंदनंदन के प्यारे

माला, तिलक, मनोहर बानी
त्रिभुवन के उजियारे … आये मेरे नंदनंदन के प्यारे

हृदय कमल के मध्य बिराजत
श्री बजरंग दुलारे  … आये मेरे नंदनंदन के प्यारे

प्रेम सहित बसत उर मोरे
नेह जु टरत न टारे  … आये मेरे नंदनंदन के प्यारे

परमानंद करत न्यौछावर
वारंवार उबारे  … आये मेरे नंदनंदन के प्यारे

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

सबसे ऊंची प्रेम सगाई … सबसे ऊंची प्रेम सगाई
दुर्योधन को मेवा त्यागो
साक विदुर घर खाई … सबसे ऊंची प्रेम सगाई
जूठे फल शबरी के खाये
बहुविधि प्रेम लगाई … सबसे ऊंची प्रेम सगाई
प्रेम के बस अर्जुन रथ हांक्यो
भूल गये ठकुराई … सबसे ऊंची प्रेम सगाई
राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर किन्हो
ता में जूठ उठाई … सबसे ऊंची प्रेम सगाई
ऐसी प्रीत बढ़ी बृन्दावन
गोपीन नाच नचाई … सबसे ऊंची प्रेम सगाई

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

रे मन ! मस्त सदा दिल रहना, आन पड़े सो सहना
आत्म नशे में देह मिला के, साक्षी होकर रहना … रे मन …..
कोई दिन घी-गुड, मौज उड़ाना, कोई दिन भूखे रहना
कोई दिन कंबल, कोई दिन अंबर, कभी दिगंबर सोना … रे मन …..
कोई दिन खाट पलंग बिछाना, कोई दिन धूल बिछोना
कडवा मीठा सबका सुनना, मुख अमृत बरसाना … रे मन …..
आन पड़े सो सहना … रे मन …..

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

कर सत्संग अभी से प्यारे, नहीं तो आखिर रोना है,
अंतकाल कोउ काम न आवत, वृथा जगत रिझवाना है ।
बड़े-बड़े तो गए मिजासी, उनका कहाँ ठिकाना है?
कर अबहूँ से कुछ तैयारी, नहीं तो फिर पछताना है ।
पड़ा रहेगा महल खजाना, छोड़ सब कुछ जाना है,
खिलापीला कर देह बढाया, वह भी अगन जलाना है ।
जो जो दीखता वह ही बिगड़ता, निर्विकार दिखैया है,
अजर अमर एक अविनाशी, रंग अवधूत का कहना है ।

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

कनक बरन बाल,नगन लसत भाल,
मोतिन के माल उर सोहैं भली भाँति है.
चंदन चढ़ाय चारु चंदमुखी मोहिनी सी,
प्रात ही अन्हाय पग धारे मुस्काति है.
चुनरी विचित्र स्याम सजि कै मुबारकजू,
ढाँकि नखशिख तें निपट सकुचाति है.
चंद्रमैं लपेटि कै समेटि कै नखत मानो,
दिन को प्रनाम किए राति चली जाती है.

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

राधे के मन मे बस गए श्याम बिहारी,
श्याम रंग मे रंग गई राधा भूली सुध बुध सारी !!
श्याम नाम की चुनरी ओढ़ी श्याम नाम की चूड़िया,
अंग अंग मे श्याम समाये मिटगई सारी दूरिया
कानो मै कुंडल गल वेजंती माला लागे प्यारी !!
राधा के मन मे बस गए शयम बिहारी……

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

जय जय श्री वल्लभ प्रभु श्री विट्ठलेश साथे।
निज जन पर कर कॄपा धरत हाथ माथे।
दोस सबै दूर करत भक्तिभाव हृदय धरत
काज सबै सरत सदा गावत गुन गाथे॥१॥
काहे को देह दमत साधन कर मूरख जन
विद्यमान आनन्द त्यज चलत क्यों अपाथे।
रसिक चरन सरन सदा रहत है बडभागी जन
अपुनो कर गोकुल पति भरत ताहि बाथे॥२॥
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

नयनन ऐसी बान परी ।।
बिन देखे गिरिधरनलाल मुख ,,युगभर जात धरी
मारग जात उलट तन मोसो,मोतन दृष्टभरी ।।
तब ही ते लागी चटपटी एकटक,कुल मरियाद टली ।।
चत्रभुजदास,,छुडावन को हठ में विधि बहुत करी ।।
तब सर्वश्व हर मन हरी लीनो,देह दशा विसरी ।।

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

श्री यमुना जस जगत में जोइ गावे ।
ताके अधीन ह्वै रहत हे प्राणपति
नैन अरु बेन में रस जु छावे ॥१॥

वेद पुराण की बात यह अगम हे,
प्रेम को भेद कोऊ न पावे ।
कहत गोविन्द श्री यमुने की जापर कृपा,
सोइ श्री वल्लभ कुल शरण आवे

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

Leave a comment

Feedback

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Create a free website or blog at WordPress.com.

%d bloggers like this: