पितृयज्ञ

पितृयज्ञ जीवन में पोषण, रक्षण एवं विविध कल्याणों की अभिवृद्धि करने-कराने वाले गुरु-पितृ-बड़ों की भक्ति और सेवा ही पितृ-यज्ञ है । शरीर छोड़ने के उपरान्त भी उनकी आज्ञा मानकर चलना तथा उनके आत्म-कल्याण के लिए सत्कर्मों का अनुष्ष्ठान करना भी पितृयज्ञ ही है।

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