ब्रह्मयज्ञ

ब्रह्मयज्ञ ऋषियों की भाँति अपना सब कुछ धन-सम्पति, ऐश्वर्य, शरीर-प्राण, मन-बुद्धि, हृदय आदि सभी परमात्मा को अर्पित कर दें और फिर उनके आदेश के अनुसार ही अपने जीवन में इन सबों का उपयोग करें ।(सब कुछ वस्तुतः परमात्मा को सौंपते ही उनका र्निदेश अन्तर में क्रमशः स्पष्ट होकर प्राप्त होने लगता है ।) यह ब्रह्मयज्ञ है ।

Create a free website or blog at WordPress.com.

%d bloggers like this: